Friday, 3 October 2014

मुझे खोल कर पढ़ कर देखिये , देखिये तो सही ,प्लीज ; पूरा देखिये न ! शुरू से अंत तक देखिये ..
शायद मैं आपको छू सकूं .
प्लीज ,आप सब को छू लेने दीजिये , जाने आप में से किसके स्पर्श से मेरा उद्धार हो जाये ,मेरी दशा -दिशा बदल जाये - बंध ख़ुल जाये .
आप मुझे पढ़ भर लें ,मैं आपको छू भर लूँ - बस  यही हसरत पाले  जाने कब से, कब तक; जी रहा हूँ , जीता रहूँगा .

मेरा आपसे निराश हो जाना भी आपके गलत होने का प्रमाण नहीं हो सकता है
मेरे ब्यंग बाण मेरी अपनी मानसिकता अधिक दिखाते है .
अक्सर ब्यंग इर्ष्य से उत्पन्न होते है ,
जिनका मैं प्रत्यक्ष विरोध नहीं कर पाता उनके किसी पक्ष को पकड़ कर मैं ब्यंग बाण उपयोग कर अपने मन की भड़ास निकलता हूँ , अपना मन हल्का कर लेता हूँ.
मैं जानता हूँ , हो सकता है मैं गलत हूँ , आप ही सही .
पर मैं इसे मानता नहीं .
असहमत होने का नतलब आप आपा ही खो दीजिये ,यह तो नहीं होना चाहिए ,!
अमर्यादित असहमति ,अभद्र असहमति अपना प्रभाव व् लक्ष्य दोनों से भटक जाती है शी
वैसे आपकी मेरे से असहमति मुझे अवसर देती है , मेरी अच्छी निर्देशिका बन कर मेरा साथ देती है
प्लीज ,मुझसे प्रेम से असहमत होईये न ! बस प्रेम बनाये रखियेगा ताकि मैं आपकी असहमति रुपी रत्न को अपने भविष्य  आभुष्ण में उचित सम्मान के साथ सजा सकूँ

Thursday, 2 October 2014

I express ( write ) feelings and draw word paintings ------


सर्व रूपेण संस्थिता यश ,श्रेय, प्रेरणा ,वैभव ,शांति ,मेधा ,शील (खुसबू) प्रदान करे -आप सर्व रूपेण विजयी रहे -


क्या जरुरत है इस जानवरपन भरे शोर की ?
वैसे जानवर इंसानों की तरह न तो लाउड स्पीकर लगा कर शोर मचाते हैं ,न दिखाने के लिए किसी जानवर की बली देते हैं ,न डी जे पर नशे में कपड़े उतारते है , न जंगलों में प्लास्टिक ले जाते हैं ,जानवर न ब्लू फिल्म बनाते हैं ,न बनवाते है ,न ग्रुप में शेयर करते हैं ,जानवर शौकिया जबरदस्ती नहीं करते ,मनोरंजन के लिए न खाते ,न खिलाते , - अच्छा है जानवर पढ़े लिखे नहीं है . आज भी हथियार के नाम पर उनके पास दांत ,नाखून ,सींग ,कड़ी खाल , कांटे ,अपनी अन्य सिमित शक्ति ही है ---- कम से कम रासायनिक हथियारों का ,विश्व युद्ध का डर तो नहीं सताता.
काश हम जानवर हो जाते ,केवल जानवर जितना ही शोर करते ,उतनी ही गंदगी करते - जानवर रहते तो कम से कम ब्यापार तो नहीं करते -
काश हम जानवर होते -ये बाजार तो न सजे होते ---
काश हम जानवर होते - हमसे समस्त श्रृष्टि को कम से कम भय तो नहीं होता - शांति बनाये रखने को यूं एन ओ की जरूरत तो न होती
वार्षिक औपचारिक पूजा सुखमय ढंग से सपरिवार - पूर्वजों ,गुरुजनों ,परिवार जनों ,इष्ट मित्रों का यथायोग्य स्मरण ,वन्दन तत्पश्चात आपके हाथ का बनाया सुभोजनम --- परमात्मा वर्ष -दर वर्ष यह क्रम इसी प्रकार बनाये रखे --- मैं फिर आज याद करता हूँ पिछले वर्ष मैंने अपने बाद वालों के लिए क्या क्या किया ------
क्या जरुरत है इस जानवरपन भरे शोर की ?
 वैसे जानवर इंसानों  की तरह न तो लाउड स्पीकर लगा कर शोर मचाते हैं ,न दिखाने के लिए किसी जानवर की बली देते हैं ,न डी जे पर नशे में कपड़े उतारते है , न जंगलों में प्लास्टिक ले जाते हैं ,जानवर न ब्लू फिल्म बनाते हैं ,न बनवाते है ,न ग्रुप में शेयर करते हैं ,जानवर शौकिया जबरदस्ती नहीं करते ,मनोरंजन के लिए न खाते ,न खिलाते , - अच्छा है जानवर पढ़े लिखे नहीं है . आज भी हथियार के नाम पर उनके पास दांत ,नाखून ,सींग ,कड़ी खाल , कांटे ,अपनी अन्य सिमित शक्ति ही है ---- कम से कम रासायनिक हथियारों का ,विश्व युद्ध का डर तो नहीं सताता.
काश हम जानवर हो जाते ,केवल जानवर जितना ही शोर करते ,उतनी ही गंदगी करते - जानवर रहते तो कम से कम ब्यापार तो नहीं करते -
काश हम जानवर होते -ये बाजार तो न सजे होते ---
काश हम जानवर होते - हमसे समस्त श्रृष्टि को कम से कम भय तो नहीं होता - शांति बनाये रखने को यूं एन ओ की जरूरत तो न होती