Wednesday, 23 September 2015

हजारो साल पुराने ग्यान , विग्यान को फिर से बाद के हजारों साल के नये प्रकाश के आलोक में सुक्ष्म रूप से जाँच लेना,ज़ँचवा लेना, परख लेना, पुनःमुल्यांकन कर लेना, करवा लेना ; आवश्यक हो तो उसे संशोधित- परिवर्धित कर लेना ही उचित होगा.
खामखाह अनुचित भावना में विकास को बाधित करना उचित तो नहीं ही कहा जायेगा.
समय -परिस्थिति एवं पुनः विचार करने पर जो अनुचित प्रतीत हो, उससे मोह वश बँधे रहना,अथवा भय वश उसका त्याग नहीं करना, अथवा गलत एवं अनुचित जानते हुए भी उसे गलत कहने और मानने का साहस नहीं जुटाना प्रशंसनीय तो नहीं ही होगा.
Business and politics are not always spotless white .
समय तो अकेला ही आगे बढ़ता चला जाता है, रोकने पर भी रुकता ही नहीं - समय के बहुत दूर चले जाने के बाद ही कुछ बाते क्यूँ समझ में आती है भाई , पहले कोई क्यों नहीं समझाता, और पहले वह समझ क्यों नहीं आती.
यदि आप में से कोई अपने बच्चों को प्यार करता है, और उसका इजहार करना चाहता है, या बच्चों को खुश रखने के लिये कोई गिफ्ट देना चाहता है तो उनकी माँ को प्यार से प्रसन्न और खुश रखिये - बच्चों के लिये यह एक अच्छा गिफट होगा

वे जो संघर्ष करते हैं, लड़ने-मरने- जीतने -हारने और इन सब के बाद भी फिर से एक बार उठ कर दौड़ते हुए लड़ते रहने को तैयार हैं, वे सदैव प्रिय ही हो ; जरूरी नहीं - वे अप्रिय लगने , दिखने और समझ लिये जाने को तैयार रहते हैं - क्यों कि वे सफलता से अधिक सार्थकता को महत्व देते हैं और तात्कालिक से अधिक दिर्घकालिक दृष्टि रखते हैं.
वृक्षों से ही जंगल बनते हैं.
There is still a lot to learn even at this stage, wonderful learning and to increase digestion , further realities unfolding, really still so many unseen chapters to be visited , read , and imbibed. 
Will elaborate those later on.
Pleasant or unpleasant, but they are the real ones still to be seen , understood.