Saturday, 17 June 2017

Thursday, 15 June 2017

हम एक दूसरे से कितने ही अनजान बनने की कोशिश यूँ करते रहे !
हम और आप यादों के चौराहों से दूर कहाँ जा सके , घूमते रहें यहीं ?
मुझे अच्छा लगता है - आज भी मुझे तीता सा , कसैला सा स्वाद,  बैचैन करने वाला "वह" क्षण और चेहरे पे कई चेहरे लादे वह चेहरा ज्यों का त्यों याद  है - मैं कई  बार शब्द चित्र बना उनमें अजब-गजब रँग भर ही डालता हूँ। 
लावारिसों की तरह मेरी पहचान न हो ,सो ही सही
जब भी ऐसा होगा ,सवाल तुम पर ही उठ जायेगा।
तुम्हारी पहचान न भी हो सकेगी , तब भी सवाल ,
मेरी पहचान जो न हुई , तब भी तुम्हीं पर सवाल।
मेरी पहचान नहीं है , तब भी जमाना तुम्हें खोजेगा
मेरी पहचान थी , पर नहीं हुई , फिर तुम्हें खोजेगा। 

Tuesday, 13 June 2017

मारवाड़ी सम्मेलन से मेरा पहला परिचय १९७३ के आस पास।
मैं कलकत्ते से विस्थापित हो तृणमूल हीन सब विधि त्यक्त अपने ननिहाल में शरण लेने को विवश हुआ।  मेरे सारे छोटे से परिवार का मनोबल टुटा हुआ था।
मैं ननिहाल की कपडे की दुकान पर बैठने के लिए आदेशित हुआ। कुछ ही दिनों बाद सम्मेलन के  प्रचारक नवेन्दु शुक्ल ननिहाल की दुकान पर गया होते हुए पहुंचे।  ननिहाल वालों की और से ठंडा रिस्पॉन्स उन्हें मिला। उन्होंने शहर में स्थित अन्य समाज के लोगों तक जाने की इच्छा प्रकट की। मुझे कहा  गया की मैं उन्हें दो चार लोगों के यहॉँ पहुंचा दू. .
बस यही मेरी और सम्मेलन की पहली साझा यात्रा थी।
कलकत्ते से हायर सेकेंडरी कर  के आया था।  बिहार के बारे में कुछ नहीं जानता था।  समाज क्या है , कैसे बनता है ,कितना बड़ा है ,उसकी क्या ब्यापकता है , क्या उपयोगिता है , किताबों या शिक्षकों से जाना था।
जैसे ही ही नवेन्दु जी के साथ दूकान से उतरा , लगभग बाल शुलभ जिज्ञासा से मैंने नवेन्दु जी से कई प्रश्न जल्दी जल्दी  पूछ डाले।  क्यों , कहाँ से , किस लिए , यह क्या होता है , इससे क्या लाभ।  आदि।
उन्होंने मेरी भूख तथा शायद स्थिति को समझ लिया।
उन्होंने सामाजिक संगठन , समाज , मारवाड़ी समाज , और कुछ लोगो का नाम लिया था।  वे अनुभवी और उत्साहवं प्रचारक थे , आज मेरी यह धारणा  बनती है।  सम्मेलन के प्रति मेरी जिज्ञासा के कारण वे ही थे।

वकील , डाक्टर और भगवान  ही भगवान नजर आते हैं यदि आपको उनसे काम पड़  जाये तो। 

Monday, 12 June 2017

स्वतंत्रता के बाद यदि भारत महात्मा गाँधी के रास्ते  चलता -चलाया जाता तो यह दुर्गति नहीं होती - नितीश !
किसने नहीं चलाया ?
ग्लोब्लाइजेशन पश्चिम का अन्धानुकरण से अधिक कुछ नहीं - नितीश !
किसने ग्लोब्लाइजेशन की शुरुआत कृ ?