नेहरू ब्राह्मण , पटेल पटेल , अम्बेडकर दलित , जगजीवन दलित यह सब बताया जा रहा है पचास वर्षों से।
गाँधी क्या थे , नई पीढ़ी को पूरा पूरा बता देने में हर्ज ही क्या है !
अभी अभी जो ऊगा है वह अस्त भी यूँ अभी से ही होने लगा ,
मानो या न मानो , जो अभी ही आया वह अभी से जाने लगा।
धन छिपाया जाता है , ज्ञान बाँटा बताया जाता है। धन के लिये तिजोरी। विद्या के लिये विद्यालय। एक में केवल इनलेट , दूसरे में केवल आउटलॉट। एक कभी भरता नहीं , दूसरा कभी घटता नहीं।
"चतुर बनिया" क्यों बोला
बड़ा अनप्लीजेंट क्रूड है।
आओ मैं बताता हूँ ,
क्या बोलो ?
हाँ , अब बोलो - भारत तेरे टुकड़े होंगे ;
देखो कितना सुरीला लगता है !
फिर से बोलो - भारत तेरी बर्बादी तक
देखो , इसके बिना कितना सूना लगता है!!
Saturday, 10 June 2017
रोटी कपड़ा मकान के लिये चले हम आज स्मार्ट फोन , टावर और वाई फाई तक तो पहुंचे है ।
खुले में निपटते हम , गोबर चुनता बचपन ,अभी भी वहीं ,हम तो उनकी बेवफाई तक पहुंचे है।