Wednesday, 5 November 2014

शून्य से सौ तक की यात्रा 
हजारो साल  पुराने  मूल्यों की क्या आज और भविष्य के संदर्भ में  ब्याख्या ,पुनर्मूल्यांकन नहीं होना चाहिये ?

Tuesday, 4 November 2014

I always talk to myself through my posts. None of them is addressed to any one else. I do not solicit nor expect any reaction. 
However you are free to exercise your right which cannot be taken away by me .
Having fathered and delivered those posts in public domain, I no more have the exclusivity over them. But I cannot engage myself in any discourse,argument.
I do not express myself on politics, religion, legal controversy, on going litigation at any level, specific legal problem , specific contemporary situation-circumstances-scenario .
धन और धर्म व्यक्तिगत आग्रह के विषय ही बने रहे तो अच्छे।  सामूहिक -सामाजिक आग्रह , प्रदर्शन , चिंतन में धन अथवा धर्म नहीं ही आवे तो सही।
 इन दोनों का सार्वजनिक आग्रहसामूहिक  शोषण ईर्ष्या ,कुटेव , पद-भ्रष्ट-आचरण , पथ-भ्र्ष्ट यात्रा को आगे बढ़ाता है। 
यदि  चौबीसों घंटे सातों दिन पूरे जीवन मैं पवित्र  रह ही सकता हूँ तो मुझे किसी की क्या आवश्यकता। समुद्र मंथन से मिलने वाले ऐरावत ,लक्ष्मी , अमृत आदि रत्नो को तो सभी हर समय प्राप्त ,स्वीकार  करने के लिये तैयार हैं।
पर विष का क्या होगा।
मैं किसी क्षण यदि कमजोर पड़ ही जाउँ तब  के लिये आप में से कौन नीलकंठ बन मुझे स्वीकारेगा !
 मेघनाद , कुम्भकर्ण , ने कम से कम अपनों का साथ तो दिया।  कृष्ण ने भी अर्जुन का साथ तो दिया ही। कर्ण ने दुर्योधन का त्याग तो नहीं ही किया। अंत तक भीष्म ने सिंहासन के साथ निष्ठां निभाई।अपनों के प्रति यही धर्म है
धर्म के नाम पर भी अपनों का त्याग नहीं ही करना उचित है।
अपनों  को त्याग   धर्म का आवरण ओढ़ जो भी राम के पास  आता है , उसे देख राम भी सकुचा जाते हैं.

Monday, 3 November 2014

जिसके पास दिखाने ,गाने के लिये इतिहास नहीं हो , वह क्या करे।
जो अपना परिचय केवल खुद ही होता है , वह क्या करे।
बड़े गर्व से सर उठा गाते हो , सात पीढ़ियों की बिरुदावली
जिसे अपने माता पिता का नाम मालूम नहीं , वह क्या करे।
वर्तमान के भुज बल , बुद्धि बल ,  क्रिया बल , कर्मबल से भयभीत
इतिहास से वर्तमान को डराते हो , बार बार हारते हो पुरुषार्थ से  ,
तब बस वर्तमान का चरित्र हरण ही बचा विकल्प तुम्हारे पास