Tuesday, 18 October 2022

 ज्ञान गंगा शैक्षणिक परिवार,  दाऊद नगर के संरक्षक के रूप में मैं स्वयं पर एक नई जिम्मेदारी को अनुभव कर रहा हूँ। 

इस परिवार ने मुझे य़ह दायित्व दे मेरे उपर बड़ा उपकार किया है,  ऐसा मेरा मानना है। 

पूरे परिवार का मुखिया होने का सम्मान मुझे लघुता से भर देता है और भविष्य की जिम्मेदारी के प्रति सचेत करता है 

परिवार के प्रत्येक सदस्य विशेष अभिनंदन के अधिकारी है क्यों कि विधाता ने इनके माध्यम से भविष्य निर्माण का संकल्प लिया है। परिवार का प्रत्येक सदस्य राष्ट्रीय भविष्य में अपना योगदान देने के लिये विधि द्वारा चयनित है।  आइए हम सभी इस महती दायित्व का आनंद लें और खुद को इसके लिये तैयार करें,  समर्पित करें। 

इस परिवार से जुड़े हर अभिभावक,  शिशु,  किशोर,  युवा,  वृद्ध जो चाहे किसी भी रूप में परिवार को छाया देता हो,  या इसकी छाया में खेल कूद रहा हो,  लिख पढ़ रहा हो,  विश्राम कर रहा हो अथवा इस परिवार से निकला किसी अन्य परिवार में,  समाज में पुनर्स्थापित हो गया हो,  या होने को सचेष्ट हो को मैं एक बात के लिये आश्वस्त करना चाहूँगा कि वे सभी दी गई परिस्थितियों के सापेक्ष सम्भव सर्वश्रेष्ठ के अधिकारी है और परिवार इस सर्वश्रेष्ठ के लिये वचनबद्ध है,  निरन्तर प्रयासरत है। 

परिवार के काम को दिशा निर्देशन से जुड़े सभी वरिष्ठ से मेरी अपेक्षा रहेगी कि वे किसी एक को भी कुंठा का शिकार न होने दें। 

लाइब्रेरी,  खेलकूद,  वाद विवाद,  प्रतियोगिता,  कम्प्यूटर,  हार्डवेयर,  सॉफ्टवेयर,  वैज्ञानिक,  तकनीक उपकरण,  हमारे परम्परागत उपकरण,  हमारी परंपरा और परम्परागत जीवन  व कृषि शैली का हमारे जीवन में बहुत महत्त्व है।  आइये इन कतिपय सूत्रों को कस कर पकड़े और इनसे अपने पूर्वजों बडों को याद करते,  उनसे प्रेरणा लेते सारे परिवार को एक स्वर्णिम भविष्य की ओर ले चलें।

इतिहास से मोह या बँध नहीं,  वर्तमान ही अंत नहीं,  हमे इतिहास को समृद्ध करना है,  वर्तमान का आनंद लेते हुए भविष्य का निर्माण करना है। 

जय परिवार।  जय समाज।  जय भविष्य की यात्रा के सभी सहयात्री।  अभी अभी परिवार प्रांगण में आये सभी का स्वागत,  वरिष्ठों को आदर,  सहयोगी सभी को प्रेम। 

Monday, 5 September 2022

 लड़कियों के नसीब में अच्छे टीचर्स की गिनती लड़कों के मुक़ाबले बहुत कम होती है । ज़्यादातर टीचर्स क्लास में लार टपकाते ही आते थे । लड़कियों की साइड घूमते टहलते आ जाना और बहाने बहाने से उन्हें छूना या बड़ी लड़कियों को बाँह से पकड़ना,पीठ पर हाथ मारना और गुटका खाई बत्तीसी निकाल कर अपनी फूहड़ अश्लील हरकतों पर खी खी करना । लड़कों का मुँह दबाकर हँसना और लड़कियों का शर्म से गड़ जाना । लड़कियों का घर में शिकायत करने का मतलब घर बैठो। स्कूल में जेंट्स टीचर्स के बीच न लड़कियों की शिकायत करने की हिम्मत थी । अगर शिकायत की जाती तो सुनवाई की उम्मीद भी नहीं थीं । इस पर हम छोटी लड़कियाँ ख़ैर मनाते कि ठरकी टीचर्स एक,दो बड़ी लड़कियों में ही उलझे रहते हैं हम तक नहीं पहुँचते । वो लड़कियाँ कई-कई दिन स्कूल नहीं आती दिन ब दिन पढ़ाई में कमज़ोर होती गयीं ।

वो लड़कियाँ किस कदर तकलीफ़ और शर्म से गुजरती थी इसका अहसास था लेकिन घरों से बोलने की हिम्मत नहीं दी जाती। इस तरह की बातों पर तो बिल्कुल भी नहीं । सारी मिसालें औरतों,लड़कियों के सब्र,बर्दाश्त की दी जाती यूँ भी ग़लती किसी की भी हो बदनामी लड़कियों की हो होती है,इसलिये हर हाल में चुप रहो ।


काश टीचर्स डे पर ऐसे फटीचरों को जूतों से मारने का नियम होता ।

Friday, 26 August 2022

 बेगूसराय में काम कर रहा था।  

एक दबंग वकील साहब थे।  कोर्ट पर हावी होने और तीखा बोलने,  डराने के लिये जाने जाते थे। 

मैं उनको कोर्ट रूम में घुसते ही उनका नाम लेकर पूछता  कि बताइए वकील साहब आप किस केस में है।  कभी कभी किसी सुनवाई को बीच में रोक कर पहले उनकी फाइल निपटा देता था।  मेरा एक फाँसी का फैसला इन्हीं की संदेह उपस्थिति मे izlash  पर ही डिक्टेट किया गया था। 

एक दिन एक बड़े वकील ने हस्तक्षेप किया  : उनको पहले क्यों सुना जाता है?

मैंने कहा  : आप भी (          बाबू  ) बन जाएं,  वही ख्याति अर्जित कर ले,  मैं आपको भी पहले सुन लूँगा। 

वकील साहब पस्त  : दोनों हाथ जोड़कर  बोले,  नहीं नहीं,  मुझे नहीं बनना, आप उन्हीं को पहले सुनिए। 

मैंने कहा  : उनको पहले सुनता हूँ ताकि बाकी सुनवाई सुचारू चल सके,  कोर्ट में काम  हो।

 मैं पटना में  न्यायाधीश था।  अक्सर एक वकील साहब आते,  कोर्ट में घुसते ही चिल्लाने लगते।  कल तो सुप्रीम कोर्ट में बहस कर के आया हूँ,  आज शाम की फ्लाईट से फिर जाना है,  मेरी बहस पहले सुन ली जाये,  और यदि बहस सुन ली गई,  जो शायद interlocutory मैटर पर mentioning ही अधिक होती थी तो न्यायाधीश को धमक के साथ बोलते थे आज और अभी आदेश डिक्टेट करें नहीं तो अभी सीधे PHC के जजों के पास प्रार्थना  करूँगा।  आखिर मैं Supreme Court तक जाने वाला वकील हूँ।  खूब गरजता हुआ  वकील।  उनके दो जवान पुत्र 376 के केस में फंस गए।  उनके मैटर भी मेरे यहाँ ट्रांसफर होते थे। 24 साल पहले की बात है।

कभी किसी ने उनको गम्भीरता से नहीं लिया। 

उनके साथी वकील चाहते थे,  उनको जैसे ही कोर्ट में घुसे,  निपटा दिये जायें ताकि गम्भीर न्यायिक कार्य चल सके।

 "मैं उस माटी का वृक्ष नहीं,

जिसको नदियों ने सींचा है ।

बंजर माटी में पलकर मैंने,

मृत्यु से जीवन खिंचा है ।।


मैं पत्थर पर लिखी इबारत हूं,

शीशे से कबतक तोड़ोगे...?

मिटने वाला मैं नाम नहीं,

तुम मुझको कबतक रोकोगे...!"