Monday, 15 May 2017

मनोरंजन या सूचना के लिये जुड़े हैं जो उनका चला जाना ही भला ।
जो लड़े -झगड़े , धोये माँजें ,ले या दे , जाँचें ,बताये , सुझाये सो ही भला ।
वैसे स्वागत सबका !
मैं किसी को जाने को क्यों कहूँ ?
मैं किसी एक पुस्तक से बँधा नहीँ है ,यह हजारों साल का सँस्कार है ।सतत आत्मविवेचना ,समन्वय ,सुधार ही इसकी आत्मा है ।
अन्य धर्मावलम्बियों की तरह की अनमनीय असहिष्णुता का प्रचार प्रसार अशोभनीय आत्मघाती प्रयास है ।
जब मै अपने आपको एक बार और जाँचता हूँ तो मुझे ताड़ती निगाहों से देख आप स्व का हित नहीं कर रहे ।
पर मुझे विश्वास है , मैं.और मेरे निरंतर साफ हो विकसित हो रहे संस्कार आगे भी मेरे साथ होंगे ।
बस आत्मावलोकन की परम्परा को रोकियेगा मत ,दूसरों की देखा देखी ।
आन ,आन-बान न जुड़े , न जोड़े, बस तोड़े या फोड़े ।
खान-पान,अपना है ये ,न छूटे ,न छोड़े ,न छोड़ने दे ।
मैं किसी एक पुस्तक से बँधा नहीँ है ,यह हजारों साल का सँस्कार है ।सतत आत्मविवेचना ,समन्वय ,सुधार ही इसकी आत्मा है ।
अन्य धर्मावलम्बियों की तरह की अनमनीय असहिष्णुता का प्रचार प्रसार अशोभनीय आत्मघाती प्रयास है ।
जब मै अपने आपको एक बार और जाँचता हूँ तो मुझे ताड़ती निगाहों से देख आप स्व का हित नहीं कर रहे ।
पर मुझे विश्वास है , मैं.और मेरे निरंतर साफ हो विकसित हो रहे संस्कार आगे भी मेरे साथ होंगे ।
बस आत्मावलोकन की परम्परा को रोकियेगा मत ,दूसरों की देखा देखी ।
आन ,आन-बान न जुड़े , न जोड़े, बस तोड़े या फोड़े ।
खान-पान,अपना है ये ,न छूटे ,न छोड़े ,न छोड़ने दे ।
आपकी आस्था से मैं संघर्ष नहीं करता तो आप मेरी आस्था से विवाद करने के अधिकारी कैसे
रामराज्य कथाकारी क्या स्त्री उत्पीड़न की कथा-रचनाकारी नहीँ है ।
एक भी स्त्री पात्र के प्रति न्याय नहीं ।
क्या हजारों साल पहले जो निरूपित हुआ , पढ़ा-पढ़वाया -लिखा-लिखवाया ,सोचा-समझा गया वहीं जा कर मनुष्य को रूक जाना चाहिये क्योंकि वही सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ अन्तिम विकास का अन्तिम रूप है ?
पिछले हजारो साल की असंख्य पीढ़ियाँ और भावी पीढ़ियाँ क्या किसी काम की नहीँ ?
क्यों मुझे हजारों साल पुराने चरणस्पर्श से मुक्ति या चरणामृतपान से मुक्ति काल में ले जाना चाहते हो ।?
मैंने कौन सा पाप किया है कि मुझे अधम पाप पुँज, महापापी -प्रसिद्ध पातकी घोषित करवाने पर पड़े हो ?
तुम या वह कैसे तारण हार और पाप-पुँज-हारी ,मुक्तिदाता ?
आन ,आन-बान न जुड़े , न जोड़े, बस तोड़े या फोड़े ।
Strangers (आन ,अन्य ), and ego (आन-बान )never unite but cause rift.
खान-पान,अपना है ये ,न छूटे ,न छोड़े ,न छोड़ने दे ।
Own men and culture never leave nor allow to leave .