Monday, 6 January 2014

मै कहानी लिखूँग नहीं
कहानी सुनूंगा भी नहीं
सुनाऊंगा तो कतई  नहीं
लिखने ,लिखाने
सुनने ,सुनाने
वे सारी बातें दूर गई
मैं कहानी हुँ
कहानी ही बनता हुँ
कहानी  बन देता हुँ
बनता रहुँगा
\तुम पढ़ते रहना
कभी ख़त्म न होने वाली कहानी। 
मेरा भगवन मेरे जैसा ही होना चाहिए , दिखना चाहिए ,
रत्न जड़ित सिंहासन पर बैठा नहीं ,सारे श्रृगार ,मुकुट ,आभूषण वाला नहीं ,सीधा  सपाट  , मेरे ,जैसा। 

Saturday, 4 January 2014

मुझे भी पढ़ो
मुझे पढ़ने कब आओगे
एक रात तो जागो
मुझे पढ़ने कब जागोगे
मैं अनपढ़ा नहीं रहना चाहता
मेरे पन्ने पन्ने  को पढ़ डालो
हर शब्द ,हर वाक्य
ध्यान से पढ़ना
अंडरलाइन  कर   डालना
बहुत सा पड़ा है
ब्याख्या करने को
भावार्थ लिखने को
निहितार्थ समझने को 
तलाश जरी है
मेरी
मेरे ही द्वारा
मेरे ही अंदर
क्योंकि
मेरे अंदर
छुपे बैठे है
छद्म वेशी
बहुत सारे मै
उनमे खो गया हुँ
मैं
मुझे ढूंढ  निकालो
अपनी ही भूल भुलैया से
मैं जीना चाहता हूँ
अपने आप को
मैं  को
 किसी आवरण के बिना
जैसा हू वैसा ही अपने आप को।   
नदियाँ रोती रही ,
कॊई कृष्ण  नहीं  आया
चीर हर लिया गया
कृष्ण नहीं  ही आया।

भगीरथ तुम कहाँ  रुक  गये.

पर्वत नंगे खड़े
बिना नीर नदियाँ
या की फिर केवल
केदार सा शैलाब।

बच्चे  को धक्का देते
अपनी जान बचाते माँ -बाप
बहती तिजोरियाँ
बेसुध लाशे।

कृष्णा ,केदार,बद्री
तुम देखते रहे
 और  नदी नाले पहाड़
सब लूट लिये गये

या
 लालचासुर  खा गया
विकास या टुरिज्म ने
 चिर हरण कर लिया

धृतराष्ट्र  अँधा  बना  बैठा  था
भीस्म मौन थे
पांडव श्रीहीन
कौरव मदमस्त।

नदी ,पहाड़  सारे लूट लिए गए



Friday, 3 January 2014

अपनों के शील की रक्षा करना ही  परम धर्म हे। नई पीढ़ी को समुचित शिक्षा देना ,उसकी  मर्यादा  की रक्षा ,उसे गलत - सही , उचित -अनुचित ,का  सम्यक परिचय  करवाना ही  शिक्षण ,प्रशिक्षण  है। पर नये को गांगुलियों से बचाना ,उनसे बचा ले जाना ,नये के शील ,निज्त्व  की रक्षा करना  अत्यंत कठिन है ,खास कर जब गांगुली आशाराम चारो औऱ सफेद या काली वर्दियों ,अधिकार तथा शान औ  शौकत से सजे आदेश  देते घूम रहे  हो।
शीलहरण का प्रयास ,सुझाव ,विचार तक निंदनीय  है। ऐसे विचारों तक का विरोध किया ही जाना चाहिए , विरोध का सामर्थ्य नहीं भी हो तो भी।  शीलहरण के माध्यम, साक्षी, दर्शक  बनने  से तो  मौत  भली।
तुम्हारी सम्पूर्ण सुरक्षा ,तुम्हारी एकल निजता ,मेरी जिम्मेवारी है। पर गंगूलियो का मैं क्या कर सकता हुँ ,विरोध के सिवा। मेरी स्थिति  मेरी व्यक्तिगत इक्षाशक्ति  का  फल  है ,आप निश्चिंत रहे। 

Thursday, 2 January 2014

जब आपसे कोई पूछता  है कि आप  विवादित  क्यों  नहीं  है ,आप इतने  साफ सुथरे क्यों  है , बिना आरोपों  के कैसे इतना जीवन जी सके ,क्यों  नहीं लोगों ने आपकी निंदा  की  ,सभी  ने आपके बारे  में  भला  ही  क्यों कहा ,
आपने बिना किसी साथ  सहारे  कैसे गलत सुझावों ,निर्देशों ,मांगो  के बीच  अपने आप को बनाये  रखा , तब सचमुच मेरे पास कोई उत्तर नहीं होता।
पूछते  है उनके लिये स्वयं को निछावर कर  देने से आपको क्या मिला -तब सर झुका अपना आत्म  संतोष प्रकट करना ही श्रेयस्कर  है।
नई पीढ़ी  का भविष्य ,सम्मान , शील ,मेरे अपने बचे थोड़े से जीवन  से  बहुत  अधिक  महत्वपूर्ण  है।
आप सब  सुरक्षित है ,कोई आपके शील , सम्मान ,भविष्य पर अनावश्यक चोट  नहीं पहुचाये , यही कामना रहेगी।