Sunday, 26 November 2023

 *सुबह देश राज्यों से बड़ी खबरें*


          *26- नवम्बर- रविवार*


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*1* भाजपा पर भरोसा तेलंगाना को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा', PM बोले- कांग्रेस और बीआरएस से रहना होगा सावधान


*2* चुनाव आयोग के अनुसार छिटपुट हिंसा और ईवीएम की खराबी की घटनाओं के बीच राजस्थान में शनिवार 12:15 बजे तक प्रदेश में 74.13% मतदान दर्ज किया गया। मतगणना 3 दिसंबर को की जाएगी। बांसवाड़ा व हनुमानगढ़ जिलों में सर्वाधिक 81 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। सबसे कम पाली जिले में 65.12 प्रतिशत मतदान हुआ


*3* राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए मतदान संपन्न होने के बाद वसुंधरा राजे ने कहा कि रेगिस्तानी राज्य के लोगों ने  (भाजपा) को गले लगा लिया है और कांग्रेस के झूठे वादों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यहां कमल जरूर खिलेगा


*4* नागौर जिले में हुआ 71.89 प्रतिशत मतदान, परबतसर में भिड़े भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ता, दिग्गजों ने डाला वोट


*5* राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है. कांग्रेस का लक्ष्य सत्तारूढ़ पार्टी को हर पांच साल में सत्ता से बाहर करने के रिवाज को खत्म करना है, जबकि भाजपा अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में वापसी करना चाहती है. सूबे में वोटों की गिनती 3 दिसंबर को होगी


*6* मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान हो चुका है। अब केवल तेलंगाना में मतदान होना शेष है। इन राज्यों के चुनाव प्रचार के दौरान यह बात और उभरकर सामने आई कि मतदाता राजनीतिक दलों के प्रलोभन का शिकार बनने के लिए तैयार है।


*7* इससे भी खराब बात यह है कि वह न तो प्रत्याशी की छवि पर गौर करता है और न ही उसके दल की नीतियों की। वह यह अधिक देखता है कि उसे क्या-क्या मुफ्त मिलने वाला है? वास्तव में इसी कारण रेवड़ी संस्कृति तेजी के साथ फल-फूल रही है। विभिन्न दल मतदाताओं को तरह-तरह की सुविधाएं और वस्तुएं ही मुफ्त देने की घोषणा नहीं करते, बल्कि वे उन्हें नकद राशि देने के भी वादे करते हैं।


*8* कोई भी दल यह बताने को तैयार नहीं कि वे मुफ्त वस्तुएं, जैसे कि स्कूटी, लैपटाप, मोबाइल, सोना, मुफ्त बिजली, पानी, बस यात्रा समेत अन्य वस्तुएं और सुविधाएं देने के जो वादे कर रहे हैं, उन्हें पूरा कैसे करेंगे? वास्तव में यह वह सवाल है, जो मतदाताओं को करना चाहिए। वह यदि यह सवाल नहीं करता तो लालच और फौरी लाभ के कारण ही. 

Saturday, 7 October 2023

 Years ago, anthropologist Margaret Mead was asked by a student what she considered to be the first sign of civilization in a culture. 


The student expected Mead to talk about fishhooks or clay pots or grinding stones.


But no. 


Mead said that the first sign of civilization in an ancient culture was a femur (thighbone) that had been broken and then healed. Mead explained that in the animal kingdom, if you break your leg, you die. 


You cannot run from danger, get to the river for a drink or hunt for food. You are meat for prowling beasts. No animal survives a broken leg long enough for the bone to heal.


A broken femur that has healed is evidence that someone has taken time to stay with the one who fell, has bound up the wound, has carried the person to safety and has tended the person through recovery. 


Helping someone else through difficulty is where civilization starts, Mead said."

We are at our best when we serve others.  


Be civilized.

Thursday, 27 July 2023


मैं जानता हूँ वे अभी और भी दुरःभि -षड़यन्त्र करने से बाज नहीं आयेंगे .
असल में बड़प्पन को , वे अपने घर की कनीज़ समझते हैं ,
सारा श्रेय उनका मानों खरीदा हुआ है.
उनके लिये ईज्जत ने उन्हीं की घर की रखवाली करने का अमरपट्टा लिख दिया है.
उनका बस चले तो वे शतरंज के नियम ही बदल देंगें- कभी कोई प्यादा शह -बचते बचाते भी अपने पुरुषार्थ से भी वजीर नहीं बन सके .
खैर अब तो सैकड़ों की दुआएँ मेरे साथ हैं .
बस प्रार्थना इतनी ही करूँगा कि जो मुझे भोगना पड़े, उस सिलसिले का यहीं अन्त हो जाये.
इस सिलसिले की तपिश आप लोगों तक प्रकारान्तर से भी न पड़े.
लगता है एक नया विहान होने के पहसे अन्धकार आखिरी बार फिर एक बार गहरा कर अपने मन की निकाल लेना चाहता है.
पर परमात्मा और मेरा किया तथा आप सब का मौरल सपो्र्ट भी तो है न.
जो होगा अच्छे के लिये ही होगा.
मेरे पास इन दो हाथों के और अपने किये के अलावा कुछ भी नहीं.
पर सिर कटा लूँगा , आप सब का बाल बाँका न होने दिया है , न होने दूँगा.
पर हाँ , रहीम के ब्यंग बाण, तुलसी के उलाहने तो मुझे ही सुनने पड़ेगें
तब तक इन्तजार किजिये .
मैं भागने से रहा. सामना तो करूँगा, वह भी केवल अपनी किसी को हानि पहुँचाये बिना, बिना चरण-वंदना किये.
मुझे प्रार्थना करने से तो कोई नहीं रोक देगा. पुरुषार्थ से तो काई नहीं रोक देगा.
प्रभुतावाले के नियम कायदे मुझे तो अभी तक कम ही समझ में आये हैं.
हर प्यादा जो वजीर बनने की यात्रा पर चला है उसे सादर समर्पित.

Tuesday, 18 July 2023

 जजों के रूप में एकाउंट्स , रियल स्टेट, मर्जर, एक्वीजिशन, insolvency, audit, वैल्यूएशन आर्थिक प्रचलन, विदेश ब्यापार, आर्थिक प्लानिंग, सर्वे आदि के विशेषज्ञ नहीं होने से राष्ट्र में काले धन की ब्यवस्था वालों को एडवांटेज मिल जाता है

 Overview of a judges profile.

What it means to be a judge and not to be a judge.
Pecularites of being a judge
Splecific disqualifications that makes you unfit for a Judge
 As a Judge you will not do these at any coust.
After being a judge, so long as you are a Judge you cannot be----
Either be a judge or ---
You cannot be all or more than a judge out of these options.
These  options though available for other citizen are now not available to you either as per law, or morality, or convention or courtesy or voluntarily
You are are now Judges through you own Individual choices, never by pressure nor by any compulsions
You can walk out whenever you wish but there is no voluntary entry, the only entry is through a highly competitive legal entry point which has no second entry point, you are either in or out. Once out no option .
But then that is not the end of life nor of career .
What makes you feel like a Judge.
This is यह जजों की सभा है, यहाँ जो कुछ जानोगे, समझोगे वह कानून के दूसरे क्षेत्र मैं हो सकता है उतना ही प्रासंगिक न रहे, कानून के दूसरे क्षेत्रों मे लोगों के लिये वह  आश्चर्य जैसा लगे।अतः यहाँ की बातें अपने तक ही सिमित रखें- बाहर के लोगों के लिये यह सब बहुत अर्थ नहीं रखेगी,सावधान।
लोहार के औजार सोनार के किस काम के।
सुराही से लोमड़ी को पानी पी नहीं सकती।
इसी प्रकार बगुला थाली मै रखी खीर नहीं खा सकता।
जज को न तो क्रान्तिकारी हाना है न सूर वीर योदधा,
जज  को प्रोफेसर की तरह बहुत अप्रतिम विद्वान भीनहीं होना है
जज को साहित्यकार नहीं बनना चाहिये
न हीं जज को अपरतिम सौन्दर्यचेता कलाकार
वाचाल जज न हो यही भला
जज को प्रयोग धर्मी होने का अदिकार नहीं है
जज कानून के अन्तर्गत ही जज है, उसे सदैव  कसनून की मर्यादा का पालन करना ही होगा
कानून , संविधान ही जज का धर्म है।
जज के अपने व्यक्तिगत मूल्य उसके जज के काम के लिये महत्वहीन है।
न्याय की सामाजिक अवधारणा ही स्वीकार्य है। समाज को जो आगे बढ़ाये , सीधे खड़े रहने में मदद करे वही न्याय।
न्याय की धार्मिक व्याख्या, या नैतिक व्याख्या सदैव कानून की न्याय की व्याख्या से मेल नहीं खाती।