Tuesday, 17 January 2023
Saturday, 7 January 2023
वकालत खाने में दो तरह के वकील होते हैं।
समर्थ परिवार के सामान्य समझ के आलसी टाइप वकील जो पूर्वजों के धन, यश पर एक पहचान रखते हैं और वकालत खाने के सार्वजनिक समारोहों के कर्ता धर्ता, फाइनेंश कर्ता होते हैं और इस एवज मे वकालत खाने मे आने वाले हाकिमों, अतिथियों के बगल में बैठने, स्वागत भाषण देने, फोटो खिंचवाने का प्रथम अधिकार भोगते है। कचहरी के सामान्य मुवक्किल इनसे दूर और ये उनसे दूर, साहबों की तरह ही रहते हैं। पूर्वजों के यश, साधन आदि के कारण इनका नाम होता हैं, वकालत खाने की शान हैं ये, नियमित न्यायालय मे कम ही आते जाते हैं। इनको भी पता है कि इनको कानून की कितनी समझ है? ये जानते हैं कि थोड़ी सी फीस के बदले इतनी मेहनत और समयबद्धता इनके बस का नहीं। ये अपने आराम और दिनचर्या में रोज रोज की खींच खींच नहीं बर्दास्त करते। ये खुशामद करते और कराते हैं, हर स्तर पर चुनाव लड़ते, लड़वाते रहते हैं, डरते हैं कि कौन सा वोटर गुस्सा हो जायेगा।
खानदानी हाकिम ऐसे राय साहब, राय बहादुर आदि के परिवारों के साधनों का अप्रत्यक्ष उपभोग करते हैं और बदले मे उनको कमिश्नर आदि की रेवड़ी थमा दिया करते हैं।
एक दूसरे होते हैं, जिनका काम, समर्पण, मेहनत, समझ, दिन रात ब्रीफ पढ़ते रहना : यही जीवन हैं और हर न्यायालय मे हर मुकदमे का अपरिहार्य अंग है, हर स्तर का न्यायाधीश इनकी अंदर से ईज्जत करता है। ये सामान्य वंश परम्परा वाले होते हैं। ये हाकिमों के साथ फोटो खींच वाने के आतुर नहीं रहते। हाकिम और मुवक्किल दोनों इनकी ईज्जत करते हैं। हाँ, धीरे-धीरे ये कठोर होते जाते हैं। खरा खरा बोलते है।
ये लोकप्रिय नहीं उपयोगी होते हैं। लोकप्रियता के लिये नहीं अपनी मेहनत, समझ, अपने मुकदमे के लिये काम करते हैं।
राजनैतिक रूप से भी स्पष्ट होते हैं।ये खुशामद पसन्द नहीं, अपनी फीस पसन्द होते हैं।
ये बाप दादा के नाम का ढोल नहीं पीटते। सारी कचहरी इनकी निष्ठा, क्षमता और विधिक ज्ञान- चातुर्य का ढोल बजाती है, ये बस अपना काम करते रहते हैं
Thursday, 8 December 2022
दिल्ली के बाहर भी एक भारत बसता है। हमें उसके बारे में जानना होगा। उन्होंने कहा जिला अदालतों (District Courts) पर हमें ध्यान देना होगा। कहा कि न्याय के अधिकार (Right To Justice) को साकार करने में एक महत्वपूर्ण घटक (Components) यह सुनिश्चित करना है कि पूरा न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर (Judicial Infrastructure) हो, जो जिला स्तरीय अदालतों (District Level Courts) से शुरू होगा।
कहा- औपनिवेशिक काल में इमारतों का वास्तुशिल्प डर पैदा करने के लिए बनाए गये थे
Tuesday, 6 December 2022
वैसे अपने लिये आगे के मार्ग पर आगे बढ़ने , स्वविवेक से स्वाध्याय , स्व-विवेचन , स्वकीय -प्रज्ञा , अंतर्ज्ञान के आधार पर कभी कोई रोक नहीं है।
आगे की यात्रा में भी उनके अनुभव -प्रकाश का अवलम्ब लिया ही जा सकता है।
हाँ सावधानी जरूरी है, अतिरेक -ब्यसन-अतिरंजना - विष्फोटक उद्वेग से बचते आगे बढ़ना चाहिए - रास्ते में मिले अनुभवों -प्राप्त निष्कर्षों का सावधानी से विवेचन ही और आगे प्रखरता से बढ़ने का मार्ग है - प्रमाणित -परखा सिद्ध -अनुभूत मार्ग !!!
Sunday, 4 December 2022
स्वरचित नहीं है, उद्धृत है।
🧍ल ल ल लड़के 😊
🚶 लड़के ! हमेशा खड़े रहे...
खड़े रहना उनकी मजबूरी नहीं रही बस !
उन्हें कहा गया हर बार,
चलो तुम तो लड़के हो
खड़े हो जाओ.😁
✒️छोटी-छोटी बातों पर वे खड़े रहे ,
कक्षा के बाहर.. स्कूल विदाई पर😁
📸 जब ली गई ग्रुप फोटो, लड़कियाँ हमेशा आगे बैठीं, और लड़के बगल में हाथ दिए पीछे खड़े रहे.
वे तस्वीरों में आज तक खड़े हैं..😁
🎙️कॉलेज के बाहर खड़े होकर,
करते रहे किसी लड़की का इंतज़ार,
या किसी घर के बाहर घंटों खड़े रहे,
एक झलक, एक हाँ के लिए.
अपने आपको आधा छोड़ वे आज भी
वहीं रह गए हैं...😁
🏡बहन-बेटी की शादी में खड़े रहे,
मंडप के बाहर बारात का स्वागत करने के लिए.
खड़े रहे रात भर हलवाई के पास,
कभी भाजी में कोई कमी ना रहे.
खड़े रहे खाने की स्टाल के साथ,
कोई स्वाद कहीं खत्म न हो जाए.😁
🎈खड़े रहे विदाई तक
दरवाजे के सहारे और टैंट के
अंतिम पाईप के उखड़ जाने तक.
बेटियाँ-बहनें जब तक वापिस लौटेंगी
वे खड़े ही मिलेंगे...
वे खड़े रहे पत्नी को सीट पर बैठाकर,
बस या ट्रेन की खिड़की थाम कर वे खड़े रहे😁
🏋️बहन के साथ घर के काम में,
कोई भारी सामान थामकर.
वे खड़े रहे 😁
🛐माँ के ऑपरेशन के समय
ओ. टी.के बाहर घंटों. वे खड़े रहे 👌
🔥पिता की मौत पर अंतिम लकड़ी के जल जाने तक. वे खड़े रहे ,
अस्थियाँ बहाते हुए गंगा के बर्फ से पानी में.👌
🙋लड़कों ! रीढ़ तो तुम्हारी पीठ में भी है,
क्या यह अकड़ती नहीं.....?🤩
🎧 सभी लड़कों को समर्पित 🚩






