Till the Congress’s ruling family bows out of the picture, the fight against creeping authoritarianism will just not take off.
Sunday, 5 July 2020
मानवीय सम्बन्ध भावों में मेरी समझ में सर्वश्रेष्ठ भाव है शिक्षक भाव।
शिक्षक भाव गुरु भाव नहीं है।
गुरु और शिष्य के बीच एक दासता का सम्बन्ध होता है। यह अधीनता द्योतक संबंध उत्पन्न करता है। गुरु और शिष्य के संबंध में या तो शिष्य पर गुरु की छाप पड़ जाती है, या गुरु शिष्य को अपने समान कर लेता है। गुरु शिष्य सम्बन्ध में शिष्य गुरु के अतिरिक्त अन्य कोई जिज्ञासा नहीं रख पाता।
शिक्षक भाव गुरु भाव नहीं है।
गुरु और शिष्य के बीच एक दासता का सम्बन्ध होता है। यह अधीनता द्योतक संबंध उत्पन्न करता है। गुरु और शिष्य के संबंध में या तो शिष्य पर गुरु की छाप पड़ जाती है, या गुरु शिष्य को अपने समान कर लेता है। गुरु शिष्य सम्बन्ध में शिष्य गुरु के अतिरिक्त अन्य कोई जिज्ञासा नहीं रख पाता।
शिक्षक अपने विद्यार्थी को किसी अधीनस्थ भाव में नहीं रखता। शिक्षक शिक्षा देता है ,ज्ञान का दान नहीं।
दान ,दया ,करुणा ,क्षमा -इन सभी भावों में कहीं न कहीं दाता का अहंकार छिपा होता है। श्रेष्ठता का अहंकार।
शिक्षक के पास यह अहंकार नहीं होता। और इसी कारण शिक्षक विद्यार्थी से स्थायी गुरु शिष्य सम्बन्ध नहीं बनाता।
शिक्षक विद्यार्थी को सीमा में बांधता नहीं है।
गुरु हो सकता है , शिष्य को अपने समान बना ले , कर ले आप समान।
पर शिक्षक विद्यार्थ को अपने से श्रेष्ठ बनने के लिए ललकारता है, अपने भर शिक्षा दे कर मुक्त कर देता है।
शिक्षक नहीं चाहता की उसका विद्यार्थी जीवन भर उसकी स्टाम्प लेकर दास्य भाव से घूमता रहे।
शिक्षक विद्यार्थी के स्वतंत्र व्यक्तित्व का अभ्यर्थी होता है।
शिक्षक अप्रिय भाव से प्रशिक्षण देता है।
शिक्षक अप्रिय भाव से प्रशिक्षण देता है।
वह अपने विद्याथी से मान्यता की कामना नहीं करता। शिक्षक दक्षिणा की कामना नहीं करता।
शिक्षक विद्यार्थी को स्वतंत्र कर उसको और ऊंचाइयों पर देखना चाहता है। शिक्षक नहीं चाहता की विद्यार्थी उसका ही गुण -गान करे तथा उसके वाद, सिद्धांत या विचारों से बंध कर उसी का प्रचार करे ।
शिक्षक शोध को प्रोत्साहित करता है , विद्यार्थी को अपनी सीमा से बाहर ले जा कर स्वतंत्र कर देता है।
गुरु तथा शिक्षक दोनों के धर्म अलग अलग होते हैँ
Wednesday, 1 July 2020
हमने कुछ भी गलत नहीं किया, हमारा एकमात्र दोष ये था कि जब दुनिया बदल रही थी और अन्य समूह, समाज, ग्रुप, संगठन, राष्ट्र, राज्य, सेना, कम्पनियां समय के अनुसार बदल रही थीं, हमने कभी भी खुद को बदलने की कोशिश नहीं की, हमने कुछ नया करने की कोशिश नहीं की और यही कारण है कि हम अब ब्यवस्था और प्रतिस्पर्धा, बाजार और विमर्श से बाहर हो गए हैं।
Monday, 29 June 2020
Sunday, 28 June 2020
Wednesday, 24 June 2020
बेचे जा, बेचे जा बेचे जा,
अंडरवियर, ब्रा, मोजे तू।
मास्क, ग्लव्स, कंडोम भी,
जर्दा, सिगरेट, शराब बेच,
फर्स्ट कॉपी भी ब्रेंडड बेच,
दिखा दो, बना दूँगा, बेच तू,
सेनिटाइजर, कोरोनिल बेच,
देश, देशहित, सब कुछ बेच,
कोई दूसरा बेचे, तू पहले बेच।
बना या न बना, बनवा के बेच,
इम्पोर्ट कर, करवा के बेच,
इधर-उधर बेच, खुल्ला बेच।
अंडरवियर, ब्रा, मोजे तू।
मास्क, ग्लव्स, कंडोम भी,
जर्दा, सिगरेट, शराब बेच,
फर्स्ट कॉपी भी ब्रेंडड बेच,
दिखा दो, बना दूँगा, बेच तू,
सेनिटाइजर, कोरोनिल बेच,
देश, देशहित, सब कुछ बेच,
कोई दूसरा बेचे, तू पहले बेच।
बना या न बना, बनवा के बेच,
इम्पोर्ट कर, करवा के बेच,
इधर-उधर बेच, खुल्ला बेच।
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