Tuesday, 14 May 2019

हारने के पहले बस एक बार खबर जो होती,
मेरे यार या तो जीत होती, हार तो न होती,
गर हार ही लिखा आयें है हम, तो हार दोगुनी होती।
Education is not just filing, indexing and piling up of information but the opening of newest imagination that can have more harmonization with nature not only across the globe but the entire cosmos that must create everlasting bonds between generations.
सच्चाई  के रास्ते में बहुत कड़ी धूप रहती है, आजू बाजू कोई पानी भी पिलाने वाला नहीं मिलता, सुस्ताने की-छाँव वाली कोई जगह नहीं। रास्ते भर स्वार्थी मक्कार जंगली जानवरों की मक्कारी से भरा अंधकार और सन्नाटा। आत्मविश्वास और सतोष के साथ अकेले ही चल सकते हैं तो स्वागत है, पर खतरे तो हैं।
उन्नति, प्रगति, विकास की राहों में बाधा तो आयेंगी, विरोधी भी होंगे, प्रतियोगी भी होंगे, सदैव सब कुछ नैतिक ही होगा, उचित ही होगा, न्यायपूर्ण ही होगा इसकी भी कोई गारंटी नहीं दे सकता। हर एक अपने लक्ष्य की पुर्ति के लिए पुरजोर, हरसम्भव, हरप्रकार से प्रयास तो करेगा ही। उसे अधिकार भी है। आत्मरक्षा और स्व के विकास, वैभब के लिये सभी उपलब्ध मार्ग उसके अपने विवेक से उपयोग करने का। समाज थोड़ा बहुत डरा, धमका सकता है, दण्डभय दिखा सकता है। पर आपको तो उनको झेलना ही पड़ेगा। समाज जो करेगा, वह तो बाद की बात है। पहले तो आप पर उचित, अनुचित, अनैतिक सबकुछ गुजर चुका होगा। उन्नति के मार्ग के ये स्वाभाविक रोड़े, ब्यवधान हैं।
इन्हें पार लगा कर ही सफल हुआ जा सकता है।

Friday, 3 May 2019

Commission, brokerage, handling charges, publicity charges, hospitality and canvassing charges, customer awareness expenses and further other similar expenses heads are cost or chartered accountant's brainchild to create additional overheads, unverifiable expenses head, arbitrary discretionary beneficiary creation manipulative mind price and thereby artificially escalate the cost at different stages. These imaginary costs are supported with vouchers and identifiable individual and a cross entry, or transaction. A part of such shown to be expenses are returned to the benevolent original source with real track or evidence.
Similarly Accommodation Bills are another such fraudulent voucher supported accountant's brainchild which are used to inflate the balance sheet and increase the transactions artificially. Surprisingly enough when these ghost transactions were challenged by the revenue officials, the courts always favoured the makers.
Benifit of doubt is the pleasure treasure of all law breakers.
State and enforcement people are always declared autocratic idiots.

Monday, 29 April 2019

🌫🌫🌫🌫   *प्रारब्ध*   🌫🌫🌫🌫

    एक व्यक्ति हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करता था । धीरे धीरे वह काफी बुजुर्ग हो चला था इसीलिए एक कमरे मे ही पड़ा रहता था ।

     जब भी उसे शौच; स्नान आदि के लिये जाना होता था; वह अपने बेटो को आवाज लगाता था और बेटे ले जाते थे ।

    धीरे धीरे कुछ दिन बाद बेटे कई बार आवाज लगाने के बाद भी कभी कभी आते और देर रात तो नहीं भी आते थे।इस दौरान वे कभी-कभी गंदे बिस्तर पर ही रात बिता दिया करते थे

    अब और ज्यादा बुढ़ापा होने के कारण उन्हें कम दिखाई देने लगा था एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही उन्होंने आवाज लगायी, तुरन्त एक लड़का आता है और बडे ही कोमल स्पर्श के साथ उनको निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है । अब ये रोज का नियम हो गया ।

    एक रात उनको शक हो जाता है कि, पहले तो बेटों को रात में कई बार आवाज लगाने पर भी नही आते थे। लेकिन ये  तो आवाज लगाते ही दूसरे क्षण आ जाता है और बडे कोमल स्पर्श से सब निवृत्त करवा देता है ।

    एक रात वह व्यक्ति उसका हाथ पकड लेता है और पूछता है कि सच बता तू कौन है ? मेरे बेटे तो ऐसे नही हैं ।

    अभी अंधेरे कमरे में एक अलौकिक उजाला हुआऔर उस लड़के रूपी ईश्वर ने अपना वास्तविक रूप दिखाया।

     वह व्यक्ति रोते हुये कहता है : हे प्रभु आप स्वयं मेरे निवृत्ती के कार्य कर रहे है । यदि मुझसे इतने प्रसन्न हो तो मुक्ति ही दे दो ना ।

     प्रभु कहते है कि जो आप भुगत रहे है वो आपके प्रारब्ध है । आप मेरे सच्चे साधक है; हर समय मेरा नाम जप करते है इसलिये मै आपके प्रारब्ध भी आपकी सच्ची साधना के कारण स्वयं कटवा रहा हूँ ।

     व्यक्ति कहता है कि क्या मेरे प्रारब्ध आपकी कृपा से भी बडे है; क्या आपकी कृपा, मेरे प्रारब्ध नही काट सकती है ।

     प्रभु कहते है कि, मेरी कृपा सर्वोपरि है; ये अवश्य आपके प्रारब्ध काट सकती है; लेकिन फिर अगले जन्म मे आपको ये प्रारब्ध भुगतने फिर से आना होगा । यही कर्म नियम है । इसलिए आपके प्रारब्ध मैं स्वयं अपने हाथो से कटवा कर इस जन्म-मरण से आपको मुक्ति देना चाहता हूँ ।

ईश्वर कहते है: *प्रारब्ध तीन तरह* के होते है :

*मन्द*,
                    *तीव्र*, तथा
                                            *तीव्रतम*

*मन्द प्रारब्ध* मेरा नाम जपने से कट जाते है । *तीव्र प्रारब्ध* किसी सच्चे संत का संग करके श्रद्धा और विश्वास से मेरा नाम जपने पर कट जाते है । पर *तीव्रतम प्रारब्ध* भुगतने ही पडते है।

लेकिन जो हर समय श्रद्धा और विश्वास से मुझे जपते हैं; उनके प्रारब्ध मैं स्वयं साथ रहकर कटवाता हूँ और तीव्रता का अहसास नहीं होने देता हूँ ।

           *प्रारब्ध पहले रचा, पीछे रचा शरीर ।*
  *तुलसी चिन्ता क्यों करे, भज ले श्री रघुबीर।।*