Saturday, 27 May 2017

सारे निशान , और किताब जो दीवारें बुनते हैं ,
एक इंसान को  छांटते  , दुसरे को यूँ चुनते है 
नुमाइश सितम की , तिजारत जज्बात की 
अपनी ही कहते हैं , दूसरे की कहाँ सुनते हैं  
समन्दर  में सब को एक साथ डुबाया जाये 
सब मिल कर दिन रात बस आग बुनते है 

क्या क्या पढ़ जाते हो
कैसे ये सब पढ़ पाते हो।

कुब्जा स्पर्श , अहिल्या स्पर्श , राम-भरत स्पर्श , राम हनुमान स्पर्श , राम जटायु स्पर्श , .... पूतना स्पर्श , सुदामा स्पर्श , राधे- स्पर्श , रैदास स्पर्श , रामानंद-स्पर्श , परशुराम-स्पर्श ,
बात होती है  आज की , अभी की , और मेरी
और इतराये वह जो चला गया  या जायेगा।
उगाया,किया, कराया, सजाया सब आज का
मौज करे लहराये , सजे धजे हमारा इतिहास। 

Monday, 15 May 2017

Ask me to love you and others but do not ask me to hate him .
I never had any reason to love you but I never hated you .
You treated me with sheer contempt , You always deprived me of my human dignity . You carnally exploited me . I could not love you .
Did I ever hate or hurt you ?
Please no religious posts. No more insults for me . No more CHARNAMRIT for me .
Please excuse me .
I can still love .
But I can never hate nor preach hate.
अपने आप को कानून पढ़ाओ , खुद कनून पढ़ो , जानो ,सीखो ।
कानून की बढ़ती ब्यापकता देख यह स्पष्ट है कि अब कानून की सम्यक जानकारी से ही सुरक्षा , सम्पन्नता , स्वतंत्रता , स्वाभिमान पकी रक्षा हो सकती है ।
केवल खरीदे गये कानूनी ग्यान के भरोषे न रहे ।
स्वयं को कानूनी रुप से सशक्त बनावें ।
धन्यवाद ही अन्तिम दान है ।दो बूँद आँसू ही अन्तिम समर्पण ।स्वरक्षा ही अन्तिम शस्त्र ।स्वविवेक ही अन्तिम ग्यान ।