Thursday, 1 October 2015

हीरे मोती के यश का क्या होगा भला ,जितना बड़ा, उतनी बड़ी तिजोरी ताले, पहरा , केवल रानी या राजमुकुट की शोभा . कभी कोई न देख पाये , न जान पाये.
चमक -यश-महक-गंध- सुगंध-प्रकाश, तो बिखरा ही भला
हीरे मोती के यश का क्या होगा भला ,जितना बड़ा, उतनी बड़ी तिजोरी ताले, पहरा , केवल रानी या राजमुकुट की शोभा . कभी कोई न देख पाये , न जान पाये.
चमक -यश-महक-गंध- सुगंध-प्रकाश, तो बिखरा ही भला
हम पीसे तो क्या हुआ , महक तो फैल गयी------ रोक सको तो रोक लो,
अब किसी के बस का नहीं, हा़ँ - आँसुओं के बस में भी महक, सुगंध नहीं
मित्रता का चयन स्टेटस सिम्बोल (अति आधुनिक होने की निशानी )नहीं होकर एक  आवश्यकता है, स्वभाव है,मएक अवसर है, तक निर्मिति है , रचना है, एक नियति है , एक प्रवाह है
 जीवन का विश्लेषण करना बंद कर दो | यह क्रिया जीवन को जटिल बनाती है.
छोटे छोटे प्रश्न, परिस्थिति का कितना चिंतन करना है ,करना भी है या नहीं करना है ,क्या करना इतना आवश्यक ही है -- यह तो आपको तय करना है .
एक चिनीमट्टी का २८ रूपयें का चाय का कप पिछले तीन साल से चाय पी रहा था , निसंदेह अच्छा कप था ,सुन्दर भी था -- आज एकाएक साफ-सफाई के दौरान काम करने के क्रम में मुझसे टूट ही गया - क्या करूँ - अपने आप को कोसता रहूँ - भारी नुकसान हो गया - मैं देख कर , संभल कर साधारण काम करने की स्लईयत भी नहीं रहता - मैं निहायत निकम्मा हूँ , मैंने अपने ही नुकसान कर दिया - मैं लापरवाह हूँ -मैनें जान बूझ कर उसे तोड़ दिया क्योंकि वह कप मेरी श्रीमती जी को प्रिय था - मेरे ससुराल से आया था इस लिए मुझे मोह -ममता नहीं थी -----
कितने आयाम हो सकते है-----
यदि यह कप मेरे डोमेस्टिक हेल्प ,या पड़ोसी के बच्चे से टूट जाता तो
आखिर इतनी बड़ी घटना नहीं थी की उसपर पूरा एक अध्याय लिख ही दिया जाये .
जीवन में बहुत बड़ी बड़ी घटनाएँ होती रहती है -- उससे आगे बढिये
इस कप की डिजायन कैसी है ?इस तरह के प्रश्नों में कितनी देर उलझना है यह तो आपको ही तय करना पड़ेगा
छोटे छोटे प्रश्न, परिस्थिति का कितना चिंतन करना है ,करना भी है या नहीं करना है ,क्या करना इतना आवश्यक ही है -- यह तो आपको तय करना है .