Saturday, 4 October 2014



मैं पालने में नहीं ,हादसों की गोद में पला हूँ ,
हादसे आज भी दीखते हैं तो हौसला बढ़ता है
विरोध देख कर ताकत आती ही चली जाती है
जब कोई झुकाता है तो अकड़ता चला जाता हूँ
हादसे मेरे अपने ,बहारे तो हर वक्त तुम्हारी है 
हादसे से आती खुद्दारी मेरी , बाकी तुम्हारी है
 Live,heal and leave. Art of healing is a part of art of leaving.
मेरे शब्द को स्पर्श दो , अमर कर दो 
आँखों का दृष्टि स्पर्श ,अमर हो जायेंगे 
मेरे शब्द को स्पर्श दो , अमर कर दो 
मन का स्मृति स्पर्श , अमर हो जायेंगे
मेरे शब्द को स्पर्श दो , अमर कर दो 
ह्रदय का भाव स्पर्श ,अमर हो जायेंगे
मेरे शब्द को स्पर्श दो , अमर कर दो 
ओठों का वाणी स्पर्श , अमर हो जायेंगें 
मेरे शब्द को स्पर्श दो , अमर कर दो 
बुद्धि चक्षु का स्पर्श ,अमर हो जायेंगें 
मेरे शब्द को स्पर्श दो , अमर कर दो

ह्रदय का भाव स्पर्श ,अमर हो जायेंगे
मेरे शब्द को स्पर्श दो , अमर कर दो
ओठों का वाणी स्पर्श , अमर हो जायेंगें
मेरे शब्द को स्पर्श दो , अमर कर दो
बुद्धि चक्षु का स्पर्श ,अमर हो जायेंगें
मेरे शब्द को स्पर्श दो , अमर कर दो
आसमान के झुकने तक , मेरे हौसलों का इम्तिहान हो जाने दो
मुझे खोल कर पढ़ कर देखिये , देखिये तो सही ,प्लीज ; पूरा देखिये न ! शुरू से अंत तक देखिये ..
शायद मैं आपको छू सकूं .
प्लीज ,आप सब को छू लेने दीजिये , जाने आप में से किसके स्पर्श से मेरा उद्धार हो जाये ,मेरी दशा -दिशा बदल जाये - बंध ख़ुल जाये .
आप मुझे पढ़ भर लें ,मैं आपको छू भर लूँ - बस यही हसरत पाले जाने कब से, कब तक; जी रहा हूँ , जीता रहूँगा .
इम्तिहान अभी और भी बाकी हैं, सभी को हो तो जाने दो 
उत्तर बहुत सारे है ,जीतने भी प्रश्न हैं ,सभी को आने दो