Friday, 2 May 2014

 खुशवंत सिंह सर शोभन सिंह के पुत्र थे जिन्होंने भगत सिंह के खिलाफ गवाही दी थी ,जो अंग्रेज बहादुर के प्रिय ठेकेदार थे और एक समय था जब कहा जाता था आधी नई दिल्ली सर शोभन की -सारे दुनिया के नामी लोग जब भारत आते थे तो कुछ आनंद के लिये ,सत्संग के लिये खुशवंत जी के यहाँ जरुर हो लेते  थे 
मैं नई पीढ़ी का तो नहीं पर आपके जस्ट बाद की पीढ़ी का हुँ. मैने आपका संघर्ष और कामयाबी देखी। ये सब प्रेरणादायक है. आपके जो आत्मीय रिश्ते इस शहर से ( खास कर मेरे पापा और कुछ अन्य सीनियर्स ) से रहे वो याद आते हैं। हो सकता है मेरे बाद कि पीढ़ी आपकी यात्रा के बारे मे इतना नहीं जानती हो। लेकिन कम से कम इतनी उम्मीद है कि वो आपकी यात्रा के शीर्ष से राह कि दुर्गमता का अंदाजा लगा लेगी। नई पीढ़ी को आपसे उम्मीद होगी संवाद की, प्रोत्साहन और मार्गदर्शन की, उस अधिकार भाव कि जो मेरे जैसे लोग आप पर रखते आए हैँ। जहाँ तक याद रखने का सवाल है , मुझे नहीं लगता कि जो कोइ आपके करीब आया वो आपको भूल सकता है। आप विशिष्ट है , अपनी ऊर्जा से भरे, चिन्तन मे डूबे पर जीवन कि सहज़ता को बचाए हुए , रिश्ते बनाते , बिन अहंकार उन्हे निभाते , परंपरा का सम्मान करते पर नयेपन के लिये स्वागत का भाव लिये। हम उस पल का इंतज़ार कर रहे है जब आप अपने पदीय दायित्वों से मुक्त नई भूमिका लिये समाज के साथ खड़े दिखेंगे - उसे गति देते हुए। .... आपकी अभी बहुत जरुरत है , पहले से ज्यादा . अभी बैलेंस शीट बनाने का वक़्त नहीं आया , अभी तो कई पन्ने जुडने बाकी हैँ , अभी आपके लिये बहुत काम बाकी है। अभी हमें आपसे बहुत से गिफ़्ट लेने हैँ ,

प्रेमेन्द्र मिश्र जी के पोस्ट से 

Thursday, 1 May 2014

रास्ते चलने ही पड़ते हैं -चला हुआ ही रास्ता .
रास्ते वे ही जो चले जाएँ ,
चले रास्ते ही याद किये जाते है -
चले रास्तों की सफर ही याद आती  है ,चलने वाले को भी ,और बाद वालों को भी .
कुछ याद रखना हो तो ,कुछ याद करना हो तो , कुछ यादें छोड़ जानी हो तो -नये रास्ते नये तरीकों से नई सफर तय करते चलो .
मैनें नई पीढ़ी को अधिक योग्य , भरोशे लायक ,एनालिटिकल ,धैर्यवान ,साहसी  तथा पुरुषार्थी पाया है .
New generation has received more acceptingly and delivered more intelligently.
They worked harder at all levels and has shown readiness to own their deeds and all around responsibilities
जाना तो है ही न .
तब जाने की तयारी अभी से क्यों नहीं .
बिना तयारी कहीं भी कभी भी नहीं जाना चाहिए .
मैं बार बार यह समझने में लगा हूँ कि नई पीढ़ी को मुझसे और क्या तथा कितनी उम्मीदें हैं ,
वे मुझसे क्या और कैसे , कितना करने की उम्मीद रखते हैं.
मैं यह भी जानने और पहचानने का प्रयास कर रहा हूँ कि आ रही पीढ़ी कहाँ कहा ,क्या क्या और कैसे कैसे , मुझसे कुछ नहीं करने की अपेक्षा रखती हैं .
वे मुझसे कितना बदलने की उम्मीद रखती है .आखिर काफी कुछ बदल तो गया ही है न .
मैं बैलेंस सीट बनाने में जूटा हूँ ताकि मेरे आडिटर ,मेरी नई पीढ़ी ,मुझे जांच सके 
मैं आपको क्या गिफ्ट दे कर जाऊँगा , आप सब मुझे कैसे याद करोगे , 
आप क्या उम्मीद रखते हैं . 
मेरा और आपका जैसा भी जितना भी साथ रहा उसमे याद रखने लायक कुछ तो होगा 
मैं बार बार यह समझने में लगा हूँ कि नई पीढ़ी को मुझसे और क्या तथा कितनी उम्मीदें हैं ,
वे मुझसे क्या और कैसे , कितना करने की उम्मीद रखते हैं.
मैं यह भी जानने और पहचानने का प्रयास कर रहा हूँ कि आ रही पीढ़ी कहाँ कहा ,क्या क्या और कैसे कैसे , मुझसे कुछ नहीं करने की अपेक्षा रखती हैं .
वे मुझसे कितना बदलने की उम्मीद रखती है .आखिर काफी कुछ बदल तो गया ही है न .
मैं बैलेंस सीट बनाने में जूटा हूँ ताकि मेरे आडिटर ,मेरी नई पीढ़ी ,मुझे जांच सके 
मैं आपको क्या गिफ्ट दे कर जाऊँगा , आप सब मुझे कैसे याद करोगे , 
आप क्या उम्मीद रखते हैं . 
मेरा और आपका जैसा भी जितना भी साथ रहा उसमे याद रखने लायक कुछ तो होगा !