Tuesday, 11 February 2014

Big dreams alone are not enough. Big dreams lead you to do or die zone and if you fail to do you will have to die.
If you deserve, learn the art of claiming it ;desire alone is not enough.

Sunday, 9 February 2014

Someone is watching me constantly. I am under your watch . It is good for me.It helps me track myself. It reminds me of my priorities. I am duty bound to regulate and trim myself. I have to earn and deliver as per the expectation. My duties are mine.My responsibilities are always mine . All risk around is mine .I must direct myself truly even under pressure or influence. I must not yield nor succumb and must fight up till my last drop of blood or last breath.. I have my hand , head , heart and of course my tooth and nails.
शक तो तुम कर सकते हो।
नहीं भी कर सकोगे तब भी।

वैसे भी तुम शक तो करोगे ही
क्योंकि विश्वास कर सकते नहीं।

भरोसा क्यों नहीं होता तुम्हे
भरोसा कब उठा  दिया तुमने।

हौसला बांध भरोसा करो तो सही
शक की जरूरत रहेगी ही नहीं। .

भरोसा अपने जमीर पर ,ईमान पर
भरोसा अपने तीर पर ,कमान पर।

शक कोई दवा नही ,शक की दवा नहीं
भरोसा करो , दुआ करो ,शक नहीं। 
मैं प्यादा था ,तब भी तंज
आज वजीर हूँ ,तब भी तंज।

तुम बड़े थे ,मैं  छोटा , बहुत छोटा ,
तब फासले थे ,और  था, तंज।

बमुश्किल  मैं लड़ा ,बड़ा बना
आज फासले कम , पर है रंज।

हौसला न दिखा ,था मैं छोटा
जब दिखी औकात ,तो वही तंज। 

Friday, 7 February 2014

कल्पना कोरी कल्पना नहीं होती
वह उतना ही सत्य है
जितना तुम औ मैं।

मैंने देखा है
कल्पना के दांत , नाख़ून।
कल्पना की जीभ कटार की तरह
दोनों और तेज धार वाली होती है।

कल्पना को मैंने
आंसुओं  से भींगा देखा है।

ओठ काटते
दांत पर दांत चढ़ाये देखा है।

उसे साँस लेते देखा है
उसकी साँस उखड़ते  भी देखा है।

मैं देखता रहता हूँ
मैनें अभी अभी देखा है।

देखोगे तो तुम भी
पर बरसों स-सदियों बाद। .

जो कुछ तुम आज देख रहे हो
वर्षों पहले वे  सब कल्पना ही तो थी।

मैं आज देख रहा हूँ जिसे , तुम भी देख सकोगे
रक्त ,मांस मज्जा चढ़ जाने पर,शायद कल।

गांधी , जिसे मैनें देखा है
वह तुम्हारे लिए केवल कल्पना रहेगा।

अँधेरी रात में दिये  को अकेला देख
आँधियों का  मन मचलने लगा।

भयाक्रांत दिये को देख
हवाएँ ललचने लगी।

देख कर इस नजारे को
एक जख्मी पतंगा भाग चला। 

पतंगे कि आवाज पर
 सारे परवानो का हुजूम लगा।

पतंगों ने बून ली एक चादर
अकेले कांपते दिये के चारों ओर।

आँधियो का कोई बस न चला
और वे पीछे खसकने लगी।

और जब सुबह हुई तो
दिया सुबक सुबक कर रोया।

दिये के चारों और शहीद पतंगे
दिये की आँख से आंसू  टपकने लगे।